हर कूचे में आशियाँ बसाया
इस अंधेर-नगरी में इक इबादत का दिया जलाया
लाचार के दामन में ही अपना तकिया सजाया
उसकी पस्मंदगी को मैंने ईमान की तरह अपनाया
मगर फिर भी ना इस बेघर के कर्ब को कोई समझ पाया
उन्होंने तो बस वतन की उल्फत को अपना पैमाना बनाया
शुक्र है! सिर्फ नूर की जुल्फों में ही मेरा प्यार लहलहाया
दर्द उसका अपना कर जैसे अल्लाह भी मेरे करीब आया

माना के तेरी कवायत का मकसद अब कुछ और है
ख्वाब, और उसमें तेरा आना
इस पर भी क्या चला किसी का ज़ोर है?

अगर नज़र तेरी डूबते हुए सूरज पे है
साहिल पे जो मोती टिम-टिमा रहा है
तू उसको भी रवां कर दे

The revolutionary will eventually fall silent
He won’t care, but only pretend
His war cries would mark no epoch
Memories that won’t heal, but rather mock
With bullets lodged so deep
They’ll leave no wound to fester, no pain to weep

क्रांतिकारी भी मूक हो जाएगा
नाश-मानसिक्ता से बेसुध हो जाएगा
कोई ज़ख्म नहीं बचेंगे जब टटोलने के लिए
सिर्फ़ इक कोरा इंकलाबी-पर्चा खोलने के लिए

ਏਕ ਤੇਰੇ ਬੁੱਲਾਂ ਦੀ ਮਸਤੀ
ਨਾਲੇ ਦਾਰੂ ਹੋਵੇ ਸਸਤੀ

Ek tere bullan di masti
Naale daaru hove sasti

ਦਾਰੂ ਪੀਕੇ ਸਸਤੀ
ਨਖਰੇ ਪੈਂਦੇ ਮਹਿੰਗੇ

Daaru peekey sasti
Nakhre painde mehenge

I’m a mentor
Giving you hope like a half-filled decanter
I’m a gentle villager
Oh no, Sir!
I’m an intellectual pillager

– Rap lyrics, 2005

Under the horrifying infinitude
I gasp
Clinging to her tress
that wafted like a purple squall
To break free
from the choke-hold of chaos
Stasis subsides
With lips foaming, convulsing
I nibble at her navel
the girth, the bosom
Palpating
As she sniffs the soil
underneath my fingernails