1 minutes read

ग़रीब नवाज़
के बेशक़ीमती अलफ़ाज़
अल्फाज़ो के दायरे में
छुपा इक सच है
जो लम्हों की अशर्फ़ियों से कभी ख़रीदा न गया

— पुखी उर्फ़ पाखी

31st July, 2019