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ख्वाबों से ज़िन्दगी की सच्चाई नहीं देखी जाती
अफसानों से यादों की रुस्वाई नहीं देखी जाती
जैसे परिंदों से हवा की रहनुमाई नहीं देखी जाती
और बादलों से समंदर की गहराई नहीं देखी जाती

— पुखी उर्फ़ पाखी

13th August, 2019