1 minutes read

जो पास हैं
वो दरअसल हैं कितने दूर
सौ लफ्ज़ लगते हैं बयां करने में
एक लफ्ज़ में सब चूर-चूर
कैसा फ़लसफ़ा है ये ज़िन्दगी का
आख़िर क्यों हूँ मैं इतना मजबूर?

— पुखी उर्फ़ पाखी

12th June, 2020