उम्र का तकाज़ा किये नहीं होता
आशिक़ के जनाज़े में कोई नहीं रोता
कब्र पर चादर चढ़ा कहें – –
इंसान अच्छा था
पर साला इश्क़ज़ादा फिर भी कच्चा था