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डर के दामन में लिपट कर
वो फिर खामोश सी हो गयी
आघाज़ तो कर इक बार
मुट्ठी खोल
एड़ी उठा
और आँख तो मींच…
चिलमिली धूप में
खड़े पुखराज की
मुस्कुराहट पर
रख थोड़ा सा ऐतबार

Ha ha!